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टाइफाइड का आयुर्वेदिक उपचार लक्षण

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Typhoid (टाइफाइड ) ka ayurvedik ilaj aur gharelu bachne ke tarike ki jankari aaj hum apko dene wale hai.

टाइफाइड का इलाज

टाइफाइड का इलाज

टाइफाइड का इलाज

टायफायड को मोतीझारा भी कहते है| इसका एक नाम ‘पेट ज्वर ‘ भी है, क्योकि इसका सबसे ज्यादा असर पेट पर पड़ता है|

आज हम टाइफाइड में क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए इसके बारेमे जानेंगे. इस रोग में छोटी अंत के निचले हिस्से में मल के सड़ने से छाले पड जाते है, जिनके ठीक होने में काफी समय लगता है|

टाइफाइड के कारण :

इसके कई कारण हो सकते है-

  • सामान्य ज्वर होने पर पर्याप्त दवा न लेना|
  • अनियमित दिनचर्या, भोजन समय पर न करना|
  • गंदे पानी का इस्तेमाल तथा गंदगी में रहना|
  • पेट में कब्ज बढ़ना तथा मल का सड़ना|
  • मौसम परिवर्तन के समय असावधानी बरतना| मार्च-एप्रिल में यह रोग तीव्र गति से फैलता है|
  • दूषित पानी से|

टाइफाइड के लक्षण :

सामान्यतः इसके निम्न लक्षण दिखाई देते है –

  • तेज ज्वर के दौरान रोगी बेसुध होकर बडबडा रहता है|
  • नाडी की गति मंद हो जाती है|
  • भूक प्यास जाती रहती है|
  • मुख का स्वाद बिगड़ जाता है|
  • ज्वर सदा बना रहता है|
  • रोगी अत्यंत कमजोर हो जाता है| उसका जिवन संकट में पड जाता है|
  • रोगी को नींद नहीं आती| वह डरने लगता है|
  • दाने निकलना :  प्रथम सप्ताह में रोग के उपरयुक्त लक्षण सामने आते है|
    द्वितीय सप्ताह में छोटे-छोटे सफ़ेद मोतियों जैसे चमकीले दाने रोगी की गर्दन पर दिखाई देते है|
    बाद में यह छाती से होते हुए पेट के निचे तक चले जाते है|
    दाने निकलने के दौरान रोगी का बुखार तेजी से बढ़ता है और वह बहुत बैचैनी महसूस करता है|
    ज्वर रात में बढ़ जाता है| दाने काले पड जाते है, दानो के काले पड़ जाने के साथ बुखार भी उतरा जाता है|
    रोगी को भूक लगने लगती है|

टाइफाइड से बचने का उपाय :

  • टाइफाइड रोगी को बुखार उतरने के बाद भी सावधानी बरतनी चाहिए|
  • पानी उबालकर ठंडा होने पर पिलाना चाहिए|
  • आस-पास साफसफाई पर विशेष ध्यान दे|
  • कपडे रोजाना बदलना चाहिए | तथा उन्हें गरम पानी में डालकर धोये|
  • रोगी को चावल और आइसक्रीम बिलकुल भी ना दे|
  • बुखार के दौरान रोगी को कोई सख्त चीज जैसे रोटी, मट्ठी तथा ठंडा गरिष्ठ व्यंजन नहीं देना चाहिए|

टाइफाइड का आयुर्वेदिक उपचार :

  • रोगी को पूर्ण विश्राम करना चाहिए| यह बुखार मियादी होता है, अत: अपनी मियादी यानी ७ दिन या १४ अथवा २१ दिन में उतर जाता है, परंतु टायफायड बिगड़ने पर ठीक होने में चार से छह माह भी लग सकते है|
    अत: रोगी की देखभाल अच्छी तरह से करनी चाहिए|
  • बुखार के दौरान रोगी का पाचन मुख का स्वाद ठीक रखने के खमीरा दिन में दो बार चाटना चाहिए|
  • बुखार के दौरान चाय, किशमिश की चाय आदि के साथ बिस्किट रोगी की इच्छा करने पर देनी चाहिए|
  • कमजोरी ज्यादा न चढ़े, अत: मौसमी का जूस, चीकू, पपीता आदि दिन के समय देना चाहिए|
  • रोगी की इच्छा होने पर कंगु के चावल या साबूदाना दूध में पकाकर खिलाये|
  • दाने जल्दी निकले और ज्वर से जल्द छुटकारा मिले, इसके लिए खुबकला के दाने दूध या पानी में उबालकर पिला दे तथा कुछ दाने रोगी के बिस्तर पर बिखेर दे|
  • उचित समझे तो डॉक्टर या किसी होशियार वैद्य को दिखाए|
  • इसमे ज्यादा दवाइया देने या खिलने की जरुरत नहीं होती है, बल्कि रोग के दौरान अच्छी देखभाल तथा ज्वर उतंरने के बाद भोजन तथा उसकी दिनचर्या पर ध्यान रखना जरुरी होता है |

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