निमोनिया का घरेलू उपचार आयुर्वेदिक इलाज हिंदी में

By | March 16, 2017

दोस्तों आज हम निमोनिया के लक्षण और इससे बचाव के तरीके के बारेमें जानकारी देने वाले है और इसका देसी इलाज की जानकारी हिंदी में.

निमोनिया (Pneumonia)

निमोनिया का घरेलू उपचार

निमोनिया का घरेलू उपचार

युवा लोगो से ज्यादा यह बच्चो और  वृद्धो में ज्यादा देखा जाता है , क्योकी ऋतू परिवर्तन के समय वृद्ध और  बच्चे इससे जल्दी प्रभावित हो जाते है |

जिन लोगो का तन सर्दी से जल्दी प्रभावित हो जाता है ,जिनका शरीर शीत या कफ प्रधान है ,उन्हे जरा सी सर्दी लगने पर ही निमोनिया हो जाता है |
कारण :शिशुओ को रोग उनकी माताओ या संरक्षिका की लापरवाही के कारण होता है |सर से उनका पर्याप्त बचाव नही कर पाती |

यह कारण भी है कि सर्दी में पसीना न आने के कारण शरीर की गंदगी बाहर नहीं निकल पाती |

इससे शरीर में विकार इतनी अधिक मात्रा में एकत्र हो जाते है कि त्वचा के अलावा आँत ,फेकडो तथा वृक्क उन्हे निकालने में असमर्ध रहते है |

उस समय हमारी प्रकृति अंगो में बढते विकृत पदार्थो के विरुद्ध अपना विरोध प्रकट करती है |

फलस्वरूप फेकडो में प्रदाह तथा सारे शरीर में ज्वर उत्पन्न करके में इकटठे विकारो को बाहर निकालने का प्रयत्न करती है ,

इसी को ‘निमोनिया ‘ कहते है | जब यह प्रदाह दोनो फेकडो को पूरी तरह ढक लेता है तो इसे ‘डबल निमोनिया ‘कहते है |

टाइफाइड का आयुर्वेदिक उपचार लक्षण.

निमोनिया के लक्षण :

निमोनिया होने पर –

  • रोगी को ठंड या जाडा महसूस होता है , कपकपी भी छुट जाती है |
  • सूखी खांसी आने लगती है | नथूने फुलते है |
  • सास लेने में परेशानिया होती है |
  • शिशु की पसलिया चलने लगती है |
  • बुखार चढ जाता है ,जो काफी तेज भी हो जाता है |
  • बच्चो -शिशुओ के मुह से घड-घड की आवाज आने लगती है |
  • सास लेने में जोर लगाना पडता है |
  • निंद नही आती है ,थकान महसूस होती है |
  • कष्ट एव दर्द के कारण रोगी मुह तथा कभी तीव्र हो जाती है |
  • सिरदर्द होने लगता है |पिडा के कारण शिशु का रोना बंद नही होता |वह बेचैन रहता है |

निमोनिया का घरेलू उपचार :

  • ऋतू परिवर्तन के समय सावधान रहना चहिए | रोगी को ढककर रखें ,यधासंभव ठंड से बचाएं |
  • पसली चल रही हो तो एक अंडे की आमलेट जैसी रोटी जो एक ही और सिंकी हो ,फेकडो पर रख रुई से ढककर बांध दे ,बहुत आराम मिलेगा|
  • फेकडो को गरमाहट पहुचाने के लिए रोगी की छाती पर कैस्टर ऑयल की मालिश करे |
  • तुलसी और नीबू डालकर उबाला पानी भी पिला सकते है ,छाती की सिंगाई करे तो और भी अच्छा |
  • रोगी को तुलसी ,काली मिर्च ,अद्रक ,लौंग ,गिलोय तथा इलायची का काढा बनाकर सुबह -शाम पिलाए |
  • लसुडे के पत्ते ,अमरूद के पत्ते ,काली मिर्च ,अद्रक तथा गिलाय का काढा बनकर सुबह -शाम सेवन करे |
  • ज्वर कम न हो रहा हो तो तरुंत अच्छे वैद्य या डॉक्टर को दिखाये |
  • इस दौरान उबला हुआ गुनगुना पानी ही पिने को दे तथा गरम चीजे ही खिलाएं |
  • गिलोय  ,गोखरू ,अद्रक या सोंठ तथा काली मिर्च का काढा बनकर दिन में तीन बार पिलाए |

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