बांझपन का आयुर्वेदिक उपचार

बांझपन का आयुर्वेदिक उपचार

बांझपन
बांझपन

कोई बात नहीं होती किसी कारण बांझपन आता है। बांझपन की वजह से वैवाहिक जीवन उध्वस्त हो जाता है। घर में खुशी नहीं होती। हमेशा लड़ाई झगड़े होते रहते हैं।  ऐसे में कुछ घरेलू उपचार करना चाहिए।

बांझपन का घरेलू उपाय:

  • बांझ पन दूर करने के लिए योग आचार्य स्वामी रामदेव जी द्वारा सुझाया गया एक उपाय यह है कि शिवलिंगी के बीज सौ ग्राम तथा पुत्रजीवक गिरी 200 ग्राम लेकर महीन चूर्ण बनाएं तथा मिलाकर रख ले। इसमें चौथाई चम्मच चूर्ण सवेरे नाश्ते से पहले वह शाम को भोजन से पहले गाय के दूध के साथ सेवन करें। यह वैंध्यत्व के साथ साथ बार बार होने वाले गर्भपात में भी लाभदायक है।
  • बांझपन में लक्षण अनुसार होम्योपैथी दवाई दी जाए तो बहुत ज्यादा लाभ हो सकता है। होम्योपैथी से बांझपन रोग ठीक हो सकता है। इसका प्रयोग पहले जर्मनी में हुआ था। यह प्रयोग आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों पर ही आधारित है और इसके आधारभूत सिद्धांतों हमारे प्राचीन ग्रंथों में कोई जगह वर्णित है।
  • 10 ग्राम अश्वगंधा को घी के साथ धीमी आंच पर सेंके। अब इसे एक गिलास दूध में मिलाकर उबाल लें तथा मिश्री मिलाकर सवेरे खाली पेट पिलाएं। यह प्रयोग मासिक धर्म शुरु होने के 3 दिन बाद शुरू कर के हफ्ते भर तक चलाएं। इससे बांझपन दूर होता है।
  • पीपल के पेड़ की जटा के अंकुर 6 ग्राम गाय के दूध में पीसकर सवेरे के समय 3 या 5 दिन तक सेवन करें। इसे ऋतू शुद्धी के बाद लेना चाहिए।
  • मुलहटी, मिश्री, बला, अतिबला, नागकेसर तथा बरगद की जटा बराबर मात्रा में लेकर महीन चूर्ण बनाए तथा इसमें एक चम्मच चूर्ण विषम मात्रा में शहद और घी के साथ मिलाकर सुबह शाम दूध के साथ सेवन करें। इससे संतति प्राप्ति मे आसनी होती है।
  • घीक्वार के रस में बिजोरा नींबू के बीजों को गुड कर दूध के साथ सेवन करने से गर्भ रुकने की संभावना प्रबल हो जाती है।
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