भगवत गीता के अनमोल वचन क्या है ? जानिए गीता का सार क्या है ?

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गीता का सार
गीता का सार

नमस्ते दोस्तों, आज हम आपको इस लेख के माध्यम से गीता के अनमोल वचन के बारे में जानकारी देने वाले हैं। श्रीमद्भागवत गीता को कुछ शब्दों में बयां करना बिल्कुल ही मुमकिन नहीं है, इसके अलावा आप यह भी कह सकते हैं। गीता सार को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है, यह एक महान ग्रंथ है। यह किसी सामान्य इंसान का काम नहीं है। जो भगवान विष्णु और अर्जुन के बीच की वार्ता का वर्णन किया गया है। जब अर्जुन कुरुक्षेत्र में अपने विपक्ष में खड़े अपने ही परिवारजनों और मित्रों को अपना शत्रु देखकर अपने हथियार त्याग दिए थे। तभी भगवान विष्णु ने उनको अपने धर्म का स्मरण कराया था। और धर्म और अधर्म की व्याख्या बताई थी। असल में भगवत गीता हमें जीवन में कैसे जीना चाहिए यह सिखाती है। भगवत गीता में भगवान विष्णु ने पूरे संसार को उपदेश किया है। की वास्तव में जीवन क्या है? मृत्यु क्या है ? धर्म क्या है ? अधर्म क्या है ? पाप क्या है ? पुण्य क्या है ? अपने क्या है ? पराए क्या है ? इन सभी बातों का विस्तृत रूप में भगवान विष्णु ने बहुत ही अनोखे उदाहरण के साथ अर्जुन को बताया था। और यह हिंदुओं के लिए एक महा ग्रंथ है। पूजनीय है।

भगवत गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। भगवान गीता को शब्द रूप में समझाना इस संसार में किसी के बस की बात नहीं है। लेकिन हम इस लेख के माध्यम से गीता के कुछ अनमोल वचनों की जानकारी देंगे। भगवान विष्णु ने अर्जुन को धर्म के लिए लड़ने का उपदेश इस करते हुए कुछ जीवन के सत्य बताएं। वास्तविक जीवन क्या है? और जीवन से मोक्ष पाने का रास्ता क्या है? इस सत्य से अवगत कराया था। तो चलिए जानते गीता के कुछ अनमोल वचन।

सूचि देखे :

भगवत गीता हमें क्या सिखाती है ?

भगवत गीता
भगवत गीता

भगवत गीता हमें हमारा जीवन कैसे जीना चाहिए इसके सीख देती हैं। गीता का हम शब्द रूप में विस्तार नहीं कर सकते हैं। यह एक महान काव्य है, जो भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश करते हुए जीवन सही सुख क्या है ? और मोक्ष प्राप्ति क्या है ? इसकी जानकारी दी थी। यदि आप जीवन में सच में सुखी रहना चाहते हैं। तो आपको क्या करना चाहिए? और आपको क्या नहीं करना चाहिए। गीता हमें इसका पाठ देती है। गीता का सबसे बड़ा जो श्लोक है उससे हमें उससे यह पता चलता है, कि जब जब धरती पर अधर्म  होगा तब तब भगवान धरती पर अधर्म का नाश करने के लिए प्रकट होंगे। और धर्म की स्थापना करेंगे कभी भी बुराई अच्छाई पर विजय नहीं पा सकती हैं। जैसे अच्छा समय निकल जाता है। वैसे ही बुरा समय भी निकल जाता है। इसीलिए कोई भी चीज संसार में हमेशा नहीं रहती है। उसका अंत विधि लिखी थी। और वह होना ही है। एक आत्मा ही है। जो कभी नहीं मरती है।

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिः भवति भारत, अभि-उत्थानम् अधर्मस्य तदा आत्मानं सृजामि अहम् । परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुस्-कृताम्, धर्म-संस्थापन-अर्थाय सम्भवामि युगे युगे “

इस श्लोक का अर्थ है कि जब जब धरती पर धर्म की हानि होने लगता है। और अधर्म बढ़ने लगता है। तब-तब भगवान विष्णु यानी कि भगवान पृथ्वी पर जन्म लेते हैं और सज्जनों की रक्षा करते हैं और दुश्मनों का नाश करते हैं और धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं। भगवान धर्म की स्थापना करने के लिए सभी युगों में अवतरित होते हैं। 

गीता में हमें क्या सीखने को मिलता है ?

गीता में हमें क्या सीखने को मिलता है
गीता में हमें क्या सीखने को मिलता है

गीता हमें सही मायने में जीवन कैसे जीना चाहिए इसकी सीख देती है। परिवर्तन ही संसार का नियम है। कोई भी वस्तु कोई भी प्राणी या फिर कोई भी समय हमेशा के लिए नहीं रहता है। भूत और भविष्य की चिंता करना व्यर्थ है। जो है वर्तमान है। और वर्तमान में ही जीना चाहिए। जैसे सुख हमेशा के लिए नहीं रहता, वैसे ही दुख भी हमेशा के लिए नहीं रहता है। जो व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित कर लेता है। वह उसी वक्त अपनी सफलता को निश्चित कर लेता है। जो व्यक्ति कर्तव्य बिना किसी फल के अपेक्षा से करता है। उसका मोक्ष प्राप्ति का रास्ता खुल जाता है।

भगवत गीता के वचन :

भगवत गीता के वचन
भगवत गीता के वचन

भगवत गीता कई सारे अनमोल वचन है। जिनको शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। लेकिन फिर भी हम इस लेख के माध्यम से गीता के कुछ वचन आपको बताना चाहते हैं।

  • जो व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित नहीं कर सकता है। वह जीवन में कभी सफल नहीं हो सकता है, क्योंकि उसका मन उसका शत्रु बन जाता है।
  • निराशा आपके मन को कमजोर कर देती है और आपके सफलता के मार्ग बंद कर देती हैं।
  • मृत्यु की चिंता करना व्यर्थ है, क्योंकि यह एक काल्पनिक सत्य है ।जो जीवन में आया है। उसे एक बार मरना ही है। इससे कोई नहीं बच पाया है।
  • भूत का पश्चाताप ना करें। भविष्य की चिंता ना करें। जो चल रहा है। वह वर्तमान है। जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह भी अच्छा हो रहा है। और जो होगा वह भी अच्छा होगा।
  • किसी भी चीज की लालसा ना करें, क्योंकि ना तुम कुछ लेकर आए हो ना तुम कुछ लेकर जाओगे जो है। वह यहीं पर छोड़ कर जाना है यही सत्य है। 
  • दुनिया में कुछ भी सदा के लिए नहीं है। इसके लिए मेरा तेरा छोटा बड़ा अपना पराया मनसे भेद मिटा दो। उसके बाद फिर सब तुम्हारा होगा और तुम सबके होगे।
  • तुम किस चीज का गुरूर करते हो, क्योंकि तुम्हारा शरीर अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु, आकाश से बना हुआ है। और यह इसी में मिल जाएगा। सिर्फ आत्मा स्थिर है। तो फिर तुम्हें गुरुर किस बात का है।
  • परिवर्तन ही संसार का नियम है, क्योंकि दिन खत्म होने के बाद रात आने वाली है। और रात खत्म होने के बाद पुनः उजाला होने वाला है। और दिन आने वाला है। इसके लिए व्यर्थ में चिंता करना अपने ही दुखों का कारण को जन्म देना है।
  • जो भी होता है वह व्यर्थ नहीं होता है, वह कुछ ना कुछ कारण-वश होता है।
  • मन ही किसी का मित्र और किसी का शत्रु होता है, क्योंकि जो शत्रु नहीं सोच सकता है। वह आपका मन सोच  लेता है।
  • मन को नियंत्रित और शांत करना बहुत कठिन कार्य है, लेकिन इसे ध्यान करके से संभव किया जा सकता है।
  • अगर खुद पर विश्वास है, तो व्यक्ति मन चाहा बन सकता है और इच्छित वस्तु  हो पा सकता है।
  • फल की आशा किए बिना अपने कर्म किए जाना ही सफलता का मार्ग निश्चित करता है।
  • जो व्यक्ति हमेशा संशय और  संदेह करता है वह जीवन में कभी खुश नहीं रह सकता है। 
  • क्रोध व्यक्ति के विनाश का का कारण है।
  • वासना, क्रोध और लालच आपके लिए नर्क का द्वार खोलती है।
  • जो व्यक्ति “मैं” की लालसा की भावना से मुक्त हैं वही सही अर्थो में शांति प्राप्त कर सकता है।
  • भगवान सभी प्राणियों के ह्रदय में निवास करते हैं।

श्रीमद भगवत गीता की सीख :

भगवत गीता के अनमोल वचन
भगवत गीता के अनमोल वचन

जब महाभारत हुआ तब भगवान विष्णु की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका थी। जब महान योद्धा अर्जुन ने युद्ध भूमि पर हथियार त्याग दिए। तभी भगवान विष्णु ने उनको उपदेश करते हुए जीवन की सच्चाई बताइए और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग बताएं। गीता हमें धर्म से चलना सिखाती है। और कभी भी अधर्म की विजय नहीं होती है। यह हमे सिखाती है की बुराई ज्यादा समय तक टिक नहीं सकती है। अच्छाई और नेकी का रास्ता ही आपको मोक्ष प्राप्ति में सहायता देता है। यदि जो कोई मन को नियंत्रित कर लेता है। वही सफल और सुखी रहता है। अपने जीवन में मन को नियंत्रित करना असंभव नहीं है। यह ध्यान की शिक्षा लेकर नियंत्रित किया जा सकता है। व्यर्थ में चिंता करना गलत है। कोई किसी को मार नहीं सकता है। आत्मा अमर है, क्योंकि आत्मा ना पैदा होती है न मरती है। सिर्फ वह शरीर बदलती है। काम क्रोध और मोह माया सब यहीं पर छूट जाता है। सिर्फ आत्मा ही है जो सदैव जीवित रहती हैं। जो है वह यही ही छूट जाता है। अपने जीवन का प्रत्येक क्षण का आनंद ले कर जीना ही जीवन को सही मायने में जीना है।

 

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