चमेली के गुण
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चमेली के गुण

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चमेली के गुण

सफेद रंग का चमेली का फूल जब वृक्ष पर खिलता है तो अपनी खुशबू से चारों तरफ के वातावरण को महका देता है | चमेली का फूल अपने आप में अनेक गुणों को समेटे हुए है | जहा एक और इसका प्रयोग सुगंधित इत्र और चमेली का तेल बनाने में किया जाता है , वही दूसरी तरफ इसका प्रयोग औषधि के रूप में भी किया जाता है | इसके व्दारा नेत्र , मुख , मस्तक , कोढ़ , दंत , बादी और रक्तविकार आदि रोग दूर होते है|

चमेली के गुण व घरेलू उपाय :

मूत्र रोग :

 चमेली की जड़ को साफ़ करके बकरी के दूध में पीसकर पीने से मूत्र संबंधी रोगों में लाभ होता है |

कान का दर्द :

 कान का दर्द और खुजली होने पर चमेली के तेल में एलुआ रगड़कर उसकी कुछ बुँदे कान में डालने से कान का दर्द मिट जाता है |

मुह के छाले :

 चमेली के पत्तो को साफ़ पानी में धोकर चबाने से मुंह के छाले मिट जाते है |

पुरुष रोग :

 चमेली के तेल में राई पीसकर बांधने से लिंग की कमजोरी व लिंग का टेढ़ापन दूर होकर दृढ़ता आती है |

भगंदर :

 चमेली के पत्ते , बड के पत्ते , सौंठ व्  सेंधा नमक -इन सबको छाछ के साथ बारीक पीसकर लेप करने से भगंदर दूर हो जाता है |

फोड़ा :

 चमेली के पत्तो का रस , आक की जड़ , सेंधा नमक , जवाखार को बारीक पीसकर पुल्टिस बनाकर बांधने से फोड़ा ठीक हो जाता है |

सिर की गर्मी :

  गर्मियों में सिर की गर्मी दूर करने के लिए रोज चमेली का तेल की सिर में मालिश करने से लाभ होता है |

मुंह की दुर्गंध :

 चमेली के पत्तो को पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुंह की दुर्गंध तथा दंत पीड़ा दूर होती है |

बाँझपन का इलाज :

 चमेली की जड़ , चम्पा के फूल , जीरा को छाया में सुखाकर मासिक-धर्म आरंभ होने के तीन दिन पहले से लेकर ऊपर से पानी पी ले | इससे बांझपन दूर होकर गर्भ ठहर जाता है |

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