दस्त का इलाज बच्चों के दस्त रोकने के उपाय

आजकल दस्त के कारण बच्चो को बड़ी तकलीफ होती है छोटे बच्चे को दस्त हुआ है तो आज हम आपको इसका इलाज ट्रीटमेंट बताएँगे जिससे आप दस्त का इलाज कर सकते हो. बच्चों के दस्त का इलाज शरीर को बेजान करने वाली बिमारी अतिसार, यानि पतले दस्त की डायरिया नाम से भी पहचाना जाता है … दस्त का इलाज बच्चों के दस्त रोकने के उपाय Read More »
 
दस्त का इलाज बच्चों के दस्त रोकने के उपाय

आजकल दस्त के कारण बच्चो को बड़ी तकलीफ होती है छोटे बच्चे को दस्त हुआ है तो आज हम आपको इसका इलाज ट्रीटमेंट बताएँगे जिससे आप दस्त का इलाज कर सकते हो.

बच्चों के दस्त का इलाज

दस्त का इलाज बच्चों के दस्त रोकने के उपाय
दस्त का इलाज

शरीर को बेजान करने वाली बिमारी अतिसार, यानि पतले दस्त की डायरिया नाम से भी पहचाना जाता है | गर्मी की रुतु में यह बीमारी प्रत्येक आयु वर्ग के लोगो को बराबर प्रभावित करती है |

छोटे बच्चे इसके घेरे में बहुत जल्दी आ जाते है | प्रकोप-काल के दौरान ध्यान न देने पर बच्चे मौत का शिकार भी हो जाते है | जिस बीमारी में मल का अधिक मात्रा में निस्सरण (निष्कासन) हो, उसे अतिसार कहते है |

दस्त के लक्षण :

शुरू में रोगी नाभी और पेट में मीठा-मीठा दर्द एव गडगडाहट महसूस करता है | वायु पेट में  रुक जाने पर तेज दर्द होने लगता है |

गुदा के रास्ते से वायु निकल जाने के बाद ही दर्द में कुछ राहत मिलती है | तेज अतिसार की हालत में मल लेस के साथ पतला और खून मिला होता है |

दस्त का इलाज :

दस्त से बचाव, दस्त का इलाज , दस्त रोकने के उपाय के लिए निम्न उपाय काम में लाए –

  1. बीमारी के दौरान बच्चो और बड़ो में पानी की कमी न होने दे | घर में भोजन बनाने और प्यास बुझाने के लिए पानी हमेशा उबालकर पीना चाहिए |
  2. छोटे बच्चो को दूध पिलाने से पहले दूध की बोतल और चुसनी को अच्छी तरह उबाल ले | नवजात बच्चे को बाहर का दूध न देकर माँ अपना दूध ही पिलाए |
  3. बच्चो के नाख़ून बराबर काटते रहे | पुनर्जलीकरण के लिए ओ.आर.एस. यानि ओरल रीहाइड्रेशन मिक्सर आवश्यकता के अनुसार बच्चे को पिलाते रहे, ताकि शरीर से निकल चुके पानी और नमक की पूर्ति हो सके | यह घोल घर पर भी तयार किया जा सकता है |
  4. एक सौ मी.ली. साफ पानी, चुटकी भर नमक, एक चम्मच ग्लूकोज या चीनी, दस-पन्द्रह बुँदे नींबू रस की मिलकर रोगी को स्वास्थ होने तक नियमित रूप से सेवन कराए | एक बार तैयार किया हुआ घोल बार घंटे के बाद प्रयोग न करे | आवश्यकतानुसार ताजा घोल दुबारा तैयार कर ले |
  5. रोगी को भोजन में पतली खिचड़ी, लस्सी, मुंग की दाल, दाल का सूप, नमकयुक्त निम्बू-पानी, चावल का पानी, साबूदाना, केला, सेब फल आदि देना चाहिए |
  6. रोगी को चटपटे, तेज मिर्च-मसाले वाले खाद्य-पेय पदार्थ, मेवे, पराठा, कच्ची सब्जी और मासाहारी आहार बिलकुल न दे |
  7. उलटी बंद हो जाने से दुबारा भूक लगने पर नमक युक्त दही या पतली लस्सी दे सकते है | तरल पेय पदार्थ हज्म होने पर एक ही समय पतली खिचड़ी खानी चाहिए और दुसरे दिन दाल-सब्जी खानी चाहिए|

निमोनिया का घरेलू उपचार आयुर्वेदिक इलाज हिंदी में.